Artificial intelligence Vs Human mind

Artificial intelligence Vs Human mind

WHY ARTIFICIAL INTELLIGENCE IS NOT BETTER THAN HUMAN MIND 

आजकल चारों ओर यहां चर्चा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन लोगों के सामने नई चुनौतियाँ पेश किए हैं एआई के कारण लोगों की जॉब्स जा सकती है और टेक्नोलॉजी इंसानी दिमाग से बेहतर काम करती है अगर आप लोग भी यह सोचते हैं कि यह सही है तो आप शायद गलती कर रहे हैं सबसे पहली बात है है कि इंटेलिजेंस का आर्टिफिशियल रूप इंसानी इंटेलिजेंस की मदद के लिए तैयार किया गया है फिर चाहे बात बैंकिंग सेक्टर की हो या मीडिया की हालांकि यह भी सही है कि इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन के कारण पूरी दुनिया में जॉब की जा रही है गार्टनर के मुताबिक एआई का निर्माण सॉफ्टवेयर टूल से हुआ है जिनसे समस्याओं को सुलझाया जा सकता है हालांकि एआई का कुछ ग्रुप काफी चतुर नजर आता है लेकिन यह सोचना वास्तविक है की एआई इंसानी इंटेलिजेंस की बराबरी कर सकता है जरा इन बातों पर गौर करें तो आपको भी हमारी इस विचारधारा पर यकीन हो जाएगा

  • हमारी सोच झलकती है
  • बिजनेस प्रॉब्लम्स हल करती है
  • समय और डेटा की जरूरत
  • एक काम में ही एक्सपर्ट है

हमारी सोच झलकती है

जब बात हमारी सोच की होती है तो एम एल मॉडल हमेशा उसी तरह से ऑपरेट होता है जैसे कि हम इसे प्रशिक्षित करते हैं अगर आप किसी मॉडल को किसी खास सोच विचारधारा के साथ प्रशिक्षित करते हैं तो यह मॉडल खास विचारधारा के साथ हमेशा रहेगा आपको लगातार अपने एम एल मॉडल को प्रशिक्षित करना पड़ता है और समय आने पर दोबारा भी प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अंतिम उपभोक्ता से फीडबैक के लिए कोई व्यवस्था जरूर करनी चाहिए

बिजनेस प्रॉब्लम हल करती है

आमतौर पर चाय पी और बिजनेस रीडर्स कंफ्यूज रहते हैं कि एआई उनके संसार के लिए क्या क्या कर सकता है टी आई के बारे में उनकी कुछ गलत धारणा भी होती हैं गार्डनर के मुताबिक बिजनेस लीडर्स को मिथक और वास्तविकता को  अलग रखकर भविष्य की रणनीति बनानी चाहिए हर संस्थान को अपनी रणनीति पर एआई के संभावित प्रभाव को आकलन करना चाहिए हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि कैसे यह टेक्नोलॉजी बिजनेस से जुड़े समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती है

समय और डेटा की जरूरत

इंसानों के अंदर कम जानकारी होने पर पर भी तुरंत सीखने का गुण है एमेल मॉडल इसके विपरीत होते हैं उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए काफी डाटा कानपुर देना पड़ता है उदाहरण के लिए किसी इंसान को साइकिल दिखाएं और उसे बताएं कि साइकिल किस तरह से चलाई जाती है कुछ दिनों में व्यक्ति साइकिल सीख सकता है लेकिन वही एक रोबोट को साइकिल चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए लाखों घंटों का समय लगेगा मशीन खुद फैसला नहीं ले पाती हैं और इंसानी भावनाओं को कभी ऑटोमेटेड नहीं किया जा सकता है

एक काम में ही एक्सपोर्ट

मशीन लर्निंग टी आई की खास कैटेगरी में शामिल है इंसानी दिमाग से प्रेरित हो सकती है हालांकि इंसान के दिमाग की बराबरी नहीं कर सकती है उदाहरण के लिए इमेज रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी ज्यादा था इंसानों के मुकाबले काफी एक्यूरेट परिणाम देती है हालांकि जब किसी गणित की समस्या को सुलझाने की बात आती है तो यह किसी काम के नहीं रह जाती है एआई एक काम को बहुत अच्छी तरीके से कर सकते हैं लेकिन परिस्थितियों में थोड़ा सा बदलाव करने पर यह पूरी तरीके से फेल हो जाते हैं

इसीलिए दोस्तों आप लोगों को बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है कि एआई की वजह से आप लोगों की जॉब को किसी भी प्रकार का खतरा है

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